पोस्टमैन के जूते – Motivational story in hindi

पोस्टमैन के जूते – Motivational story in hindi

 

पोस्टमैन के जूते – Motivational story in hindi

कहते हैं सेंसिटिविटी एक बहुत बड़ी क्वालिटी है। दूसरों के दुखों को महसूस करना उसे कम करने की कोशिश करना कोई छोटा-मोटा काम नहीं होता। ये बहुत बड़ा काम होता है और स्पेशली आजकल के टाइम में जब इंसान अपनी ही चीजों में इतना उलझा हुआ रहता है उस टाइम किसी दूसरे का दुख किसी दूसरे की परेशानी को हल करना कोई छोटी बात नहीं है और अगर ऐसे में भी कोई इंसान है। चलिए इसी पर ही एक छोटी सी कहानी बतता हूँ।

ये कहानी है एक पोस्टमैन की, जिसका नाम मोहन था जो की बरसों से माधवपुर और आसपास के गांव में चिट्टियां बांटने का काम किया करते थे। एक दिन उन्हें चिट्ठी मिली जिसका पता माधवपुर के करीब का ही था लेकिन आज से पहले उन्होंने इस पते पर कोई छुट्टी नहीं पहुंचाई थी तो रोज की तरह आज भी उन्होंने अपना थैला उठाया और चिट्टियां बांटने निकल पड़े।

सभी चिट्टियां बांटने के बाद वह नए पते की ओर बढ़ने लगे। दरवाजे पर पहुंच कर उन्होंने आवाज दी। अंदर से किसी लड़की की आवाज आई और उसने कहा की वही दरवाजे के नीचे से चिट्ठी दीजिए। इस पर मोहन काका सोचते हैं। अजीब लड़की है इतनी दूर से चिट्ठी लेकर आता हूं और यह महारानी दरवाजे तक भी नहीं आ सकती। ऐसा सोचकर उन्होंने कहा, मैडम बाहर आइए, साइन करने पड़ेंगे। यह सुनने के बाद अंदर से उस लड़की की आवाज आई। अभी आती हूं।

वह इंतजार करने लगे। पर जब 2 मिनट तक कोई नहीं आया तो उनका पेशंस जवाब दे गया। क्या यही काम नहीं रहेगा। मेरे पास टाइम नहीं।है जल्दी करिए और भी चिठ्ठियाँ पहुँचानी है। ऐसा कहकर वह दरवाजा पीटने लगा। कुछ देर बाद दरवाजा खुला और वह आदमी हैरान रह गया। एक बारह साल की लड़की थी जिसके दोनों पैर कटे हुए थे और उसे देखने के बाद उन्हें अब अपने इंपेशेंस पर शर्मिंदगी महसूस हो रही थी। वो लड़की बोली क्षमा कीजिएगा। मैंने आने में देर लगा दी। बताइए कहां साइन करने हैं। मोहन काका ने साइन करवाएं और वह वहां से चले गए।

इस घटना के आठ दस दिन बाद की बात है। काका को फिर से उसी पते की चिट्ठी मिली। इस बार भी सब जगह चिट्टियां पहुंचाने के बाद, वह उस लड़की के घर पहुँचे, काका ने कहा आपकी चिट्ठी आई है। साइन की जरूरत नहीं है। नीचे से डाल दूं क्या? अंदर से उस लड़की की आवाज़ आई, रुक जाईये मैं आती हूँ। कुछ देर बाद वह लड़की वहाँ आई। काका लाइए मेरी चिट्ठी और ये लीजिये आपके लिए तोहफा, लड़की मुस्कुराते हुए बोली।

इस पर काका थोड़ी से हिचकाहट होकर बोले बेटा इसकी क्या जरूरत थी। लड़की ने जवाब दिया बस ऐसे ही। आपका काम अच्छा लगा इसलिए आपके लिए ये तोहफा, आप इसे लेकर जाइएगा। ठीक है। उस लड़की की बात सुनने के बाद वह घर की तरफ बढ़ चले।

उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि उस में क्या होगा। घर पहुंचते ही उन्होंने वह डिपा खोला और वह गिफ्ट देखते हैं। उनकी आंखों से आंसू टपकने लगे। उसमें उनके पैर के लिए एक जोड़ी जूते थे।मोहन काका सालों से नंगे पांव ही चिट्टियां पहुँचाया करते थे। लेकिन आज तक किसी ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया था। यह उनके जिंदगी का सबसे कीमती तोहफा था।

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